आप सबका कविकोष की पहली रचना देखने के लिए स्वागत है
कब तक तुम मुझको रोकोग
यह रचना उन असामाजिक तत्वों के लिए है जो आज भी रूडी वादी सोच को बढ़ावा दे रहे हैं अनुर कमज़ोर लोगो का शोषण कर रहे है
कब तक तुम मुझको रोकोगे . कब तक तुम मुझको रोकोगे
बर्बादी की अग्नि में कब तक तुम सपने झोकोगे
कब तक तुम मुझको रोकोगे . कब तक तुम मुझको रोकोगे||
लाचारी की उमस में खुशियों के बहते झोको को
देखेंगे कैसे रोकोगे
कब तक तुम मुझको रोकोगे . कब तक तुम मुझको रोकोगे||
अंत्योदय के जलज की मल में सौम्यता देख चौकोगे
कब तक तुम मुझको रोकोगे . कब तक तुम मुझको रोकोगे||
बेईमानी के पेड़ों को उठकर तुम अपने हाथों से
देखेंगे कैसे रोपोगे
कब तक तुम मुझको रोकोगे . कब तक तुम मुझको रोकोगे||
सच्चाई के उजियारो को रोक पाखंड के अंधकारो को
देखेंगे कैसे सोपोगे
कब तक तुम मुझको रोकोगे . कब तक तुम मुझको रोकोगे||

